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प्रमुख कविताएँ

अभिनव कोमल सुन्दर पात -विद्यापति

आदरें अधिक काज नहि बंध -विद्यापति
आहे सधि आहे सखि -विद्यापति
आसक लता लगाओल सजनी -विद्यापति
अम्बर बदन झपाबह गोरि -विद्यापति
ए धनि माननि करह संजात -विद्यापति
कंटक माझ कुसुम परगास -विद्यापति
आजु नाथ एक व्रत -विद्यापति
उचित बसए मोर -विद्यापति
कुंज भवन सएँ निकसलि -विद्यापति
गंगा-स्तुति -विद्यापति
कान्ह हेरल छल मन बड़ साध -विद्यापति
के पतिआ लय जायत रे -विद्यापति
कि कहब हे सखि रातुक -विद्यापति
बसंत-शोभा -विद्यापति
गौरी के वर देखि बड़ दुःख -विद्यापति
कुच-जुग अंकुर उतपत् भेल -विद्यापति
लोचन धाय फोघायल -विद्यापति
कामिनि करम सनाने -विद्यापति
जय- जय भैरवि असुर भयाउनि -विद्यापति
चन्दा जनि उग आजुक -विद्यापति
जाइत देखलि पथ नागरि सजनि गे -विद्यापति
जनम होअए जनु -विद्यापति
जाइत पेखलि नहायलि गोरी -विद्यापति
जखन लेल हरि कंचुअ अचोडि -विद्यापति
जौवन रतन अछल दिन चारि -विद्यापति
हम जुवती पति गेलाह -विद्यापति
नव यौवन अभिरामा -विद्यापति
जोगिया मोर जगत सुखदायक -विद्यापति
बटगमनी -विद्यापति
बड़ अजगुत देखल तोर -विद्यापति
बारहमासा -विद्यापति

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